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वक़्त (TIME)




वक़्त (TIME)

अक्सर हम कहते है अपना वक़्त आएगा, पर क्या ये सच है ? क्यूंकि सच में देखा जाए तो वक़्त आता नही चला जाता है I इसलिए वक़्त का इन्तेजार नही मत करो जो चल रहा है उसको बेहतर बनाने की कोशिश में लग जाओ I नही तो जिंदगी भर अच्छे वक़्त का इन्तेजार करते रह जाओगे I

पर इसका मतलब ये नही की कोई भी वक्ति रातों रात सफल हो जाये I एक सफल वक्ति की सफलता की पीछे वर्षों की मेहनत होती है जो सिर्फ उस वक्ति को ही पता रहता है की संघर्ष के दिनों में उनसे क्या क्या तकलीफें, मुश्किले, और खुद पर कितना संयम रखा था I संयम के रूप में खुद की इक्षाओं को दबाया, भोतिक सुख के प्रलोभन से खुद को दूर रखा, और हर दिन एक एक कदम अपनी सफलता की को अग्रसर रहा I जैसे बिना गिरे कोई सायकिल तक नही सिख सकता तो सफलता इतनी आसानी से कैसे मिल जाये इसको पाने के लिए ठोकर भी खाना पड़ता है और गिर के संभालना भी होता है I जो अपनी ठोकर को सबक के रूप में याद रखकर फिर से खुद को आगे बदने के लिए प्रेरित करता है सिर्फ और सिर्फ वही सफल होता है I क्यूंकि दुनियां में 98 % लोग आपको आगे बढ़ने से रोकते है वो कभी नही चाहते की कोई उनसे आगे निकले I इसलिए प्रेरित या Motivate करने के लिए आपके सलाहकार या शिक्षक के तौर पर सिर्फ आप होते और आपकी किताबें होती है I

ऊपर के तथ्यों से मेरे कहने का सिर्फ एक ही मकसद है की अगर सच में सफल होना है तो सुरुआत करने के लिए वक़्त का इन्तेजार मत करे बल्कि सुरुआत के बाद सफल होने तक धीरे धीरे अपने सफलता की और अग्रसर रहे I सुरुआत से सफ़ल होने तक वक़्त जरुर लगेगा पर वो जो वक़्त बीतेगा वो आपकी सोच और जिंदगी बदल देगा और आज तक जो अपने नही सिखा या देखा होगा वो वक़्त जिंदगी के सारे सबक सिखा देगी I


और कितने इम्तेहान लेगा वक़्त तू ..... जिंदगी मेरी है तो फिर मर्जी तेरी क्यू .....”

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